#CSIR, जो कि एक केंद्रीय ऑटोनॉमस बॉडी है, ने फिर एक पत्र जारी करके अपने
#NPS कर्मचारियों पर डेथ या डिसेबिलिटी के मामलों में
#OPS के विकल्प को न दे पाने की अपनी असमर्थता को स्पष्ट कर दिया है जो आज के समय में माननीय
@narendramodi जी के विशाल सपने
#एकभारत_श्रेष्ठभारत की खुली तौहीन ्री @DrJitendraSingh जी, आपका ध्यान विभिन्न मंत्रालयों के तहत लगभग 3000
#CABs में काम करने वाले लाखों NPS कर्मचारियों की इस विकराल समस्या की तरफ ले जाना चाहता हूं:-
✓22 दिसंबर 2003 को केंद्र सरकार ने सभी केंद्रीय कर्मचारियों के लिए
#NPS का गजट जारी किया, जिसे 01 जनवरी 2004 से लागू किया गया। केंद्रीय ऑटोनॉमस बॉडीज में भी इसको लागू किया गया।
✓इस पॉलिसी में जब जब कोई बदलाव किया गया, उसे केंद्रीय ऑटोनॉमस बॉडीज के भी NPS कर्मचारियों पर भी लागू किया गया। जैसे, 2019 में जब सरकारी अंशदान 10% से बढ़ाकर 14% किया गया तो इसको भी हर जगह लागू किया गया भले ही यह काम देर सवेर हुआ हो।
✓लेकिन जब केंद्र सरकार ने 2021 में डेथ और डिसेबिलिटी के केस में
#OPS का विकल्प लागू किया तो इसको कुछ केंद्रीय ऑटोनॉमस में तो लागू कर दिया गया और ऐसे केसों में
#OPS भी दे दी गई लेकिन ज्यादातर
#CABs में इसे 4 साल बीतने के बाद भी लागू नहीं किया गया।
✓ NPS के अंतर्गत
#UPS के विकल्प को 15 महीनों बाद भी आज तक इन संस्थाओं के NPS कर्मचारियों पर लागू नहीं किया जा सका जिसके कारण सैकड़ों कर्मचारियों को रिटायर होने के बावजूद कुछ हासिल नहीं हो पाया है।
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#CSIR का यह पत्र मात्र एक बानगी है अंग्रेजों के दोहरे कानूनों की जिसे आज भी ढोया जा रहा है। किंतु आपके नेतृत्व में हमें भरोसा हैं कि कर्मचारियों की यह दुर्दशा बंद होगी और
#एकभारत_श्रेष्ठभारत बनाने के लिए केंद्रीय और केंद्रीय ऑटोनॉमस के NPS कर्मचारियों के साथ एक समान व्यवहार होगा।
#ManjeetSinghPatel