नालों की सफाई हाथ से कराई जाती है लेकिन देशभर में वोट EVM मशीन से डाला जाता है.
जहाँ मशीनों की जरूरत है वहाँ रस्सी और बाल्टी देते हैं और जहाँ काग़ज़ मुहर और बैलेट बॉक्स देना चाहिए वहाँ EVM से चुनाव कराया जाता है.
ऐसे में ताज़ी ख़बर ये है कि चुनाव आयोग बिहार चुनाव में ऐप से वोटिंग कराना चाहता है. मोबाइल ऐप की शुरुआत भी की जा रही है जिसकी मदद से बिहार के लोग बिना वोटिंग सेंटर पर गए भी वोट डाल सकेंगे.
EVM क्या कम था जो अब ऐप भी लाँच करेंगे? पूरी दुनिया के देश मूर्ख हैं क्या जो अभी भी बैलेट पेपर से वोट करवाते हैं? और आप बड़के आधुनिक हो गए हैं जो मशीन और ऐप से चुनाव करायेंगे?
सुन के बड़ा hifi लग रहा होगा न कि अरे ग़ज़ब…अपना बिहार भी अब भौकाली बन गया है…घर बैठे वोट करेंगे…एकदम बिगबॉस की तरह…एकदम ड्रीम इलेवन वाला फील मिलने वाला है…है न!
बिहार के मतदाताओं…कान खोल कर सुन लीजिए…आप लोग अगर इस चमक-दमक के चक्कर में पड़े…और मोबाइल से वोट डालने की हिमाकत किए…तो वही हाल होगा जो लाटरी जीतने के नाम पर आपके तमाम साथियों का हुआ है…फ्रॉड…समझे न!
जितनी ठगी आजकल मोबाइल से हो रही है उतनी और किसी चीज से नहीं…अब तक खाते से रुपया कटता रहा है, लेकिन अब वोट भी ठग लिया जाएगा…
अगर आप लोग चार रोटी कमाने के चक्कर में दिल्ली-बंबई और सूरत पहुँच जाते हैं तो क्या अपना भाग्य बदलने के लिए मतदान केंद्र तक भी नहीं जा सकते? किसी के बहकावे में मत आइएगा…चुपचाप वोटिंग सेंटर पहुंचकर अपना वोट अपने हाथ से डालकर आइएगा.
ज़्यादा ऐप और मोबाइल फोकासी के चक्कर में पड़े तो वोट भी हैक कर लिए जाएगा और आप हाथ मलते रह जाएँगे.
और ये जो चुनाव आयोग है, उसे बिहार की साक्षरता दर के आंकड़े मालूम नहीं हैं क्या? …61 % साक्षरता दर वाले प्रदेश में ऐप से वोटिंग करवाने का मतलब समझते हैं? ये सीधा-सीधा लोकतंत्र पर डकैती की व्यवस्था बनाई जा रही है.
ये मोबाइल ऐप से घर बैठे ऑनलाइन वोटिंग करवायेंगे? देश की जनता को मूर्ख समझा है क्या? कोई सवाल नहीं पूछ रहा इसका मतलब ये मत समझिए कि लोग समझ नहीं रहे हैं. लोग सरकार की बदमाशी खूब समझ रहे हैं.
जब तक देशभर के नालों की सफाई मशीनों और रोबोट से नहीं शुरू होगी, सफाईकर्मियों के ज़हरीली गैसों और नालों में डूबकर मरने की ख़बरें आना बंद नहीं होंगी, तब तक इस देश में ईवीएम से वोटिंग हराम है.
अस्पतालों के बाहर बच्चियाँ एम्बुलेंस में दम तोड़ रही हैं, लोग जानवरों की तरह ट्रेनों में भरकर पलायन कर रहे हैं, नौकरी मांगने वाले युवाओं को पटना की सड़कों पर पीटा जा रहा है, ज़हरीली शराब पीकर लोग दम तोड़ रहे हैं और अपराध के नए रिकॉर्ड बनाये जा रहे हैं…लेकिन सरकार जनता की आँख में सिंदूर झोंकना चाहती है.
अब जब जनता के पास हिसाब किताब का मौक़ा आया है…अब जब जनता के हाथ में सरकार की कॉपी आई है तो फेल होने से बचने के लिए जनता को ऑनलाइन वोटिंग और मोबाइल वोटिंग का लॉलीपॉप दे रहे हैं?
इस बार बिहार के मतदाताओं को जितनी सतर्कता से वोट देना है, उतनी ही पैनी नज़र बिहार में पत्रकारिता करने आ रहे नोएडा के पत्रकारों पर भी रखनी है.
तमाम पत्रकार सरकार का नमक चाट कर पत्रकारिता करने बिहार आयेंगे…उन्हें नजरअंदाज नहीं करना है. पटना के भाजपाई पत्रकारों से भी सतर्क रहना है.
ध्यान से समझ लीजिए और सतर्क हो जाइए…इस चुनाव से आपके पाँच साल का भविष्य ही नहीं, आपकी अगली पीढ़ियों का भाग्य भी तय होगा.
बिहार में चुनाव करीब आ चुका है और दिल्ली वालों के हेलीकॉप्टर भी आपके सिर पर मंडराने लगे हैं…इन हेलीकॉप्टर्स को आप चुनावी गिद्धों से कम मत समझिएगा.
ये आपका वोट छीनने और ठगने आए हैं. हेलीकॉप्टर की धूल आँखों में मत जाने दीजिएगा…अचंभित मत होइएगा…ये आपके ही खून पसीने की कमाई है जो आसमान में उड़ रही है…इसमें आपकी मेहनत का पेट्रोल जल रहा है.
मोदीजी बिहार में रैली पे रैली किए जा रहे हैं…अब तक पाँच चक्कर लगा चुके हैं…जितना खर्चा इनकी रैलियों पे हुआ है उतने में बिहार के लोगों को एक बड़ा अस्पताल मिल सकता था…लेकिन किसे पड़ी है जो ये सब बताए?
खैर, मैं और ज़्यादा बोलूँगी तो चार चाटुकार और सरकारी गवैये आकर “बिहार में सब बा” का गीत गाने लगेंगे…तो फ़िलहाल चलती हूँ…जुड़े रहिएगा.
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