पुलिस का काम कानून लागू करना है, चालान काटना है। जनता का काम सवाल पूछना है और यह उसका अधिकार भी है।
लेकिन जब सड़क किनारे सफेद मार्क के बाहर खड़ी गाड़ी का चालान किए जाने पर एक युवक सवाल करता है, और अधिकारी का वीडियो बनाते समय उसे “बे***ोद” जैसी गाली दी जाती है तो यह सिर्फ एक घटना ंता का विषय बन जाता है।
क्या कानून लागू करने का अधिकार किसी अधिकारी को अपमानजनक भाषा इस्तेमाल करने की छूट देता है?
क्या नियमों पर सवाल उठाने वाले नागरिक को जवाब के बजाय गाली मिलनी चाहिए?
अगर जनता से शालीनता की अपेक्षा है, तो क्या वही जिम्मेदारी वर्दी पहनने वालों पर लागू नहीं होती?
कानून का डर जरूरी है लेकिन क्या सम्मान के बिना कानून टिक सकता है?
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