तालिबान के राज में औरत होना ही सबसे बड़ा 'गुनाह' बन चुका है!
10 साल की मासूमों से किताबें छीनी जा रही हैं, सड़कों पर सरेआम कोड़े बरसाए जा रहे हैं, और दुनिया की 'इंसानियत' गहरी नींद में सो रही है।
कहाँ मर गए वो कैंडल मार्च निकालने वाले फेमिनिस्ट? कहाँ हैं वो ह्यूमन राइट्स के तों पर छाती पीटते हैं?
अफ़गान औरतों की चीखें तुम्हें सुनाई नहीं देतीं या तुम्हारा एजेंडा यहाँ फेल हो गया है?
यह कल्चर नहीं, 'प्योर बर्बरता' है! तुम्हारी चुप्पी इस जुल्म में बराबर की हिस्सेदारी है। 🚩🔥