गुजरात मॉडल स्पष्ट है - दलितों, पिछड़े वर्ग और गरीबों के लिए बुलडोज़र, जबकि अडानी के लिए हजारों एकड़ ज़मीन मुफ्त में या मात्र ₹1 की।
गांधीनगर, गुजरात के पेथापुर बस्ती में 400 से अधिक परिवारों के घर 'अवैध' बता कर उजाड़ दिए गए, जबकि उनके पास बिजली के बिल, टैक्स रसीदें, राशन दाता पहचान पत्र जैसे वैध पहचान और रिकॉर्ड मौजूद थे।
गुजरात ही नहीं, दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह की तोड़फोड़ की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। और कई मामलों में, जैसा कि गांधीनगर में था, लोगों के पास अदालतों द्वारा दिए गए स्टे आदेश भी मौजूद थे।
बीजेपी को साफ़ पता है कि वो असली जनादेश के जरिए सरकार नहीं बना सकते; उनकी सरकार चोरी से और संस्थाओं पर कब्ज़ा कर बनती है। इसलिए वो गरीबों के अधिकार छीन लेते हैं, और देश की संपत्ति को अपने कुछ अरबपति मित्रों को सौंप देते हैं।
भारत का लोकतंत्र जनता के अधिकारों के लिए है, और उनके लिए ही चलेगा। BJP और उसके मित्रों की देश से चोरी हम चलने नहीं देंगे।