प्रत्यंचा टूट गई तो क्या फिर से पिनाक मैं बाँधूंगा अड़चन आएंगी आने दो अंतिम साँसों तक साधूंगा कब तक चूकेंगे साध्य मेरे भाग्य सहारा नहीं हूँ मैं 🚩