मनुष्य प्रकृति से अलग नहीं है, क्योंकि ईश्वर ही दोनों के रचयिता हैं.. हमें सिर्फ मनुष्य धर्म का पालन करना है और मेरी राधा रानी भी तो यही चाहती हैं..